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Chilli Market Report 2020

* मिर्ची की रिपोर्ट * चीन में कोरोना वायरस फैलने से भारत के मिर्ची के निर्यात झटका लगा, इस कारन लाल मिर्च तेजा सिर्फ पांच दिन में 190-200 रु किलो से घटकर 120-125 रु किलो आ गयी थी। लेकिन बांग्लादेश, फिलिपिंस, थाइलड की अच्छी मांग से भाव फिर 145-160 रु किलो पहुंच गए हैं। चीन की भी गुंटूर मंडी में ताजा पूछपरख देखी जा रही है।' आंध्रप्रदेश की मंडी गुंटूर में नई लाल मिर्च के भाव चीन की मांग थमते ही नीचे आ गए थे लेकिन अन्य देशों की मांग के साथ स्टॉकिस्टों की खरीद एवं पहले फॉरवर्ड में नीचे में बेच चुके कारोबारियों की लेवाली से लालमिर्च बाजार फिर से तेज हुए है। तेजा लालमिर्च 190-210 रु से सिर्फ पांच दिन में 50 रु किलो घट गयी थी, लेकिन अब यह फिर से अपने पुराने उच्च स्तर की ओर बढ़ रही है। बता दें कि पिछले सीजन में इन दिनों तेजा मिर्च 85-88 रुपए किलो बिक रही थी। हालांकि, सीड वेरायटी लालमिर्च के दामों में बड़ी गिरावट नहीं आई और यह 120-130 रु किलो पर मिल रही है। सीड वेरायटी लालमिर्च की खरीद घरेलू मसाला कंपनियां करती हैं। कारोबारियें का कहना है कि उन्होंने इससे पहले मिर्च के भावों में एक-एक दिन में इतना ज्यादा उतार चढ़ाव नहीं देखा। पहले लालमिर्च के दाम दस रुपए किलो बढ़ने में 15-20 दिन तक लग जाते थे लेकिन इस साल इतनी हलचल एक दिन में ही हो रही है।'कारोबारियों का कहना है कि भारतीय लालमिर्च में चीन की बीते सीजन वर्ष 2019 में जबरदस्त खरीद रही जबकि अब बांग्लादेश, श्रीलंका, फिलीपिंस, थाइलैंड आदि देशों की खरीद आक्रामक है। आमतौर पर जनवरी महीने की शुरुआत में लालमिर्च के दाम नई आवक के साथ घटने लग जाते हैं लेकिन यह पहला ऐसा साल है जब आवक को नजरअंदाज कर भाव मजबूत रहे। हालांकि, आने वाले दिनों में चीन की खरीद कैसी रहती है, पर इसके भावों की चाल तय होगी।''' बता दें कि लालमिर्च का पिछले सीजन में कैरी फारवर्ड स्टॉक 40-45 लाख बोरी (प्रति बोरी 40 किलोग्राम) था लेकिन इस साल कोल्ड स्टोरेज खाली पड़े हैं। हालांकि, देश भर में लालमिर्च की पैदावार पिछले साल के समान ही होगी लेकिन पिछले साल पुराना स्टॉक था जो इस साल नहीं है। ऐसे में 40-45 लाख बोरी की कम उपलब्धता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह भी एक मुख्य वजह है लालमिर्च के दाम सुर्ख हो रहे हैं। आंध्रप्रदेश एवं तेलंगाना में इस साल लालमिर्च की पैदावार 2-2.25 करोड़ बोरी रहने की संभावना है जबकि कर्नाटक में 60-65 लाख बोरी, मध्यप्रदेश में 8-10 लाख बोरी की उपज रहेगी। इस तरह कुल उत्पादन देश भर का 3.25-3.50 करोड़ बोरी (प्रति बोरी 40 किलोग्राम) के आसपास रह सकता है जो पिछले साल के समान ही होगा। लेकिन कैरी ओवर स्टॉक नगण्य होने से बाजार में जो आवक होगी, वह स्टॉक में नहीं जा पाएगी क्योंकि घरेलू पाइपलाइन खाली है।'कुछ कारोबारी मानते हैं कि चालू सीजन 2019-20 (जुलाई-जून) में लालमिर्च' का उत्पादन 15% बढ़ने का अनुमान है। सरकार ने वर्ष 2018-19 में लालमिर्च का उत्पादन अनुमान 17 लाख टन आंका था जबकि कारोबारी अनुमान 13 लाख टन था। बता दें कि आंध्रप्रदेश देश में पैदा होने वाली कुल लालमिर्च में लगभग 45% योगदान देता है। इसके बाद बड़े उत्पादक राज्यों में तेलंगाना, कर्नाटक, मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र का नाम आता है।

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